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मधुमेह(diabetes)- प्रकार. कारण. उपचार. रोकथाम!

 मधुमेह(diabetes) क्या है-

मधुमेह एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें रोगी के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा (blood sugar level) आवश्यकता से अधिक हो जाती है.ऐसा  दो  वजहों  से  हो सकता है : या तो आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में insulin नहीं produce कर रहा है या फिर आपके cells produce हो रही इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं कर रहे. इंसुलिन एक हारमोन है जो आपके शरीर में carbohydrate और fat के metabolism को कण्ट्रोल करता है.मेटाबोलिज्म से अर्थ है उस प्रक्रिया से जिसमे शरीर खाने को पचाता है ताकि शरीर को उर्जा मिल सके और उसका विकास हो सके.

हम जो खाना खाते हैं वो पेट में जाकर energy में बदलता है जिसे glucose कहते हैं.  अब काम होता है इस energy/glucose को हमारे body में मौजूद लाखों cells के अन्दर पहुचाना, और ये काम तभी संभव है जब हमारे pancreas (अग्न्याशय) पर्याप्त मात्रा में insulin produce करें. बिना इंसुलिन के glucose cells में प्रवेश नहीं कर सकता. और तब हमारे cells ग्लूकोज़ को जला कर शरीर को उर्जा पहुंचाते हैं. जब यह प्रक्रिया सामान्य रूप से नहीं हो पाती तो व्यक्ति मधुमेह से ग्रस्त हो जाता है.

सामान्य स्वस्थ व्यक्ति में खाने के पहले blood में glucose का level  70 से 100 mg./dl रहता है। खाने के बाद यह level 120-140 mg/dl हो जाता है और फिर धीरे-धीरे कम होता चला जाता है। पर मधुमेह हो जाने पर यह level सामन्य नहीं हो पाता और extreme cases में 500 mg/dl से भी उपार चला जाता है.

मधुमेह के कारण क्या हो सकते है-

Genetic (अनुवांशिक) –

डायबिटीज एक अनुवांशिक रोग है यानी अगर किसी के माता पिता को डायबिटीज है तो उनके बच्चो हो भी मधुमेह होने की सम्भावना ज्यादा होती है.

खान पान और मोटापा –

जंक फ़ूड या फ़ास्ट फ़ूड खाने वाले लोगो में मधुमेह के सम्भावना ज्यादा पाई जाती है. क्योकि इस तरह के खाने में वसा (fat) ज्यादा पाया जाता है जिससे शरीर में कैलोरीज की मात्रा जरुरत से ज्यादा बढ़ जाती है और मोटापा बढ़ता है जिसके कारण इन्सुलिन उस मात्रा में नहीं बन पाता जिससे शरीर में शुगर लेवल में बढ़ोतरी होती है.

अन्य कारण-

  •  ज्यादा शारीरिक क्षम न करना
  • मानसिक तनाव और डिप्रेशन
  • गर्भावस्था
  • ज्यादा दवाइयों के सेवन
  • ज्यादा चाय, दूध, कोल्ड ड्रिंक्स और चीनी वाले खाने के सेवन
  • धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन
  •  ज़्यादा तला या बाहर का खाना खाने से बढ़ता हुआ वज़न भी डायबिटीज़ का कारण है।
  • व्यायाम या कोई शारीरिक श्रम ना करना।
  • ज़्यादा मीठा खाना।
  • अगर कोई ह्रदय संबंधी बीमारी है, तो डायबिटीज़ हो सकती है।
  • बढ़ती उम्र से भी डायबिटीज़ हो सकती है।

  मधुमेह के प्रकार-

मधुमेह तीन प्रकार की होती है

1) टाइप-1 (diabetes):

यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, इसमें बीटा कोशिकाएं इंसुलिन नहीं बना पाती हैं। इस मधुमेह में मरीज़ को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि शरीर में इंसुलिन की मात्रा सही तरीक़े से बनी रहे। यह डायबिटीज़ बच्चों और युवाओं को होने की आशंका ज़्यादा होती है।

2) टाइप-2 (diabetes)- इसमें शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है या फिर शरीर सही तरीके से इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता।

3) गर्भावधि मधुमेह ( gestaional diabetes)-

 यह मधुमेह गर्भावस्था के दौरान होता है, जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इस दौरान, गर्भवती महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा ज़्यादा रहता है।

मधुमेह के जाँच परीक्षण (diabetes test)

1) A fasting blood glucose test-

 एक उपवास रक्त ग्लूकोज परीक्षण आपके रक्त शर्करा के स्तर को उपवास के 8 घंटे बाद (कोई भोजन या पेय नहीं, पानी को छोड़कर) मापता है।  यह परीक्षण हमेशा विश्वसनीय नहीं होता है, और सुबह अधिक सटीक होता है।  अलग-अलग समय पर किए गए कई परीक्षण आमतौर पर मधुमेह के निदान के लिए आवश्यक होते हैं।

2)(Oral glucose tolerance test) मौखिक  ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण-

यदि आपका प्रारंभिक उपवास रक्त शर्करा परीक्षण परिणाम सामान्य है, लेकिन आपके पास मधुमेह के कुछ लक्षण या जोखिम कारक हैं, तो इस परीक्षण का उपयोग निदान करने के लिए किया जाता है।

3)(A random glucose test)यादृच्छिक रक्त शर्करा परीक्षण-

 आपके ग्लूकोज स्तर को अनिर्दिष्ट समय पर मापता है।  मधुमेह के एक या अधिक लक्षण होने के अलावा, एक उच्च रक्त शर्करा का स्तर यह संकेत दे सकता है कि आपको यह बीमारी है।  यह परीक्षण एक उपवास ग्लूकोज या मौखिक ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण से कम सटीक है।

4)(glycated hemoglobin test  A1C) ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन परीक्षण, या ए 1 सी परीक्षण-

एक अलग तरह का रक्त परीक्षण है जो आपके रक्त शर्करा के स्तर का अवलोकन पिछले कुछ महीनों से करता है, बजाय आपके वर्तमान स्तर के केवल एक स्नैपशॉट के।  यह लाल रक्त कोशिकाओं (हीमोग्लोबिन) में ऑक्सीजन ले जाने वाले प्रोटीन से जुड़े रक्त शर्करा के प्रतिशत को मापता है।  आपके रक्त शर्करा का स्तर जितना अधिक होगा, उतना हीमोग्लोबिन आपके पास चीनी से जुड़ा होगा।  दो अलग-अलग परीक्षणों पर ए 1 सी का स्तर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक होना मधुमेह का संकेत देता है।

मधुमेह की दवाएं -

दवाएं-

मधुमेह बाले लोगो को दवा की जरूरत तब पड़ती है जब आहार और व्यायाम अकेले अपने रक्त शर्करा को एक स्वस्थ सीमा मे रखने के लिये पर्याप्त नही होते!

1) Metaformine- 

यह ग्लूकोज के स्तर को सीमित करने के लिये उपयोग की जाती है!

2) Meglitinides or Sulfonylureas-

ये दवाएं आपके अगन्याशय को अधिक इंसुलिन बनाने मे सहायक होती है!

3) Thiazolidinediones. TZDs or glitazone-

ये दवाएं इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने मे मदद करती है ये आपकी कोशिकाओ मे इंसुलिन प्रतिरोध कम करती है इसलिये आपके अग्नाशय को कड़ी मेहनत नही करनी पड़ती!

4) DDP-4 inhibitors-

यह आपके शरीर को हार्मोन को तोड़ने से रोकता है जो आपके अग्नाशय मैं इंसुलिन के लिए जाने का संकेत देता है ताकि वह लंबे समय तक कार्य करते रहें

5) Pramlintide (symlin)-

यह दवा एक हार्मोन अमाइलिन की तरह काम करती है जिसे आपका अग्नाशय इंसुलिन के साथ बाहर भेजता है

मधुमेह को कंट्रोल करने के घरेलू उपचार-

1) तुलसी की पत्तियां-

तुलसी की पत्त‍ियों के इस्तेमाल से कंट्रोल करें डायबिटीज

तुलसी की पत्त‍ियों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स को इंसुलिन के प्रति सक्रिय बनाती हैं. ये सेल्स इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाती हैं. सुबह उठकर खाली पेट दो से तीन तुलसी की पत्ती चबाएं. आप चाहें तो तुलसी का रस भी पी सकते हैं. इससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है.

2) दालचीनी का पाउडर-

दालचीनी भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख मसाला है. दालचीनी के प्रयोग से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है. ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करने और नियंत्रित करने में मददगार है. इसके नियमित सेवन से मोटापा भी कम किया जा सकता है. दालचीनी को महीन पीसकर पाउडर बना लें और उसे गुनगुने पानी के साथ लें. मात्रा का विशेष ध्यान दें. बहुत अधिक मात्रा में ये पाउडर लेना खतरनाक हो सकता है.

3) करेले का जूस-

सामग्री

  • एक करेला
  • चुटकीभर नमक
  • चुटकीभर कालीमिर्च
  • एक या दो चम्मच नींबू का रस

बनाने की विधि

  • करेले को धोकर उसका जूस निकाल लें।
  • अब इसमें स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च और नींबू का रस मिला लें।
  • अब इस मिश्रण को पिएं।

कब करें सेवन?

आप हर रोज़ सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है ?

करेले में फाइबर होता है, जो एंटीडायबिटिक यौगिक है। इसमें ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को कम करने के गुण होते हैं।

4) मेथी-

सामग्री

  • दो चम्मच मेथी दाना
  • दो कप पानी

बनाने की विधि

  • दो चम्मच मेथी दाने में दो कप पानी मिलाएं।
  • अब इसे ढककर रात भर छोड़ दें।
  • अगले दिन पानी को छानकर खाली पेट पिएं।

कब करें सेवन?

इसे हर सुबह पिएं, जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल कम होगा।

कैसे फायदेमंद है?

मेथी का उपयोग मसाले के तौर पर होता है। इसके अलावा एक स्टडी के अनुसार, मेथी में ब्लड ग्लूकोज कम करने के गुण होते हैं, जो टाइप 2 मधुमेह के इलाज में काफ़ी मददगार साबित हो सकता है।

5) एलोवेरा-

सामग्री

  • एलोवेरा का रस

क्या करें?

  • हर रोज़ दिन में एक से दो बार बिना चीनी के एलोवेरा जूस का सेवन करें।
  • आप चाहें तो डॉक्टर से बात करके एलोवेरा का कैप्सूल भी ले सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है?

हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि एलोवेरा में लिपिड और ब्लड शुगर को कम करने वाले गुण होते हैं। इसके लगातार सेवन से आपका ब्लड ग्लूकोज़ लेवल नियंत्रित रहता है।

6) आवला-

सामग्री

  • आंवले का रस
  • हल्दी
  • शहद

बनाने की विधि

  • आंवले के रस में चुटकीभर हल्दी और शहद मिलाकर पिएं। ऐसा करने से शुगर नियंत्रण में रहेगी।

कैसे है फायदेमंद?

आंवला में मौजूद क्रोमियम (chromium) ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मददगार होता है। यह इंसुलिन के प्रवाह को भी बढ़ाता है। इस वजह से, यह मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए काफ़ी फायदेमंद होता है।

7) जामुन-

सामग्री

  • जामुन
  • शहद

कैसे खाएं?

आप एक चम्मच शहद के साथ जामुन का सेवन करें, ऐसा करने से आपकी शुगर नियंत्रण में रहेगी। सिर्फ जामुन ही नहीं, बल्कि इसके पत्तों में भी डायबिटीज़ नियंत्रण करने के गुण मौजूद हैं। आप चाहे तो जामुन के बीज को पीसकर पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।

कब करें सेवन

आप हफ़्ते में एक या दो बार इसका सेवन ज़रूर करें।

कैसे है फायदेमंद?

इसमें मौजूद उच्च पोटैशियम मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

8) नीम-

सामग्री

  • नीम के पत्ते
  • नीम का पेस्ट
  • नीम का कैप्सूल

कैसे खाएं?

  • आप चाहें तो नीम के पत्तों को अच्छे से धोकर सुबक के समय खा सकते हैं।
  • एक चम्मच नीम के पेस्ट को पानी में मिलाकर सुबह-सुबह पी भी सकते हैं।
  • इसके अलावा, अगर आपको कच्चा नीम या नीम का पेस्ट पसंद नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नीम का कैप्सूल भी ले सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है?

भारत में नीम के पत्तों, छाल और फलों को कई सालों से आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसार नीम में एंटीडाइबिटिक, एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके अलावा, कुछ स्टडीज के अनुसार नीम में खून में ग्लूकोज कम करने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा यह मधुमेह को रोकने में भी मददगार साबित हो सकता है। यहां तक कि नीम, मधुमेह के दौरान होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को भी रोक सकता है।

9) अदरक-

सामग्री

  • थोड़ा सा कद्दूकस किया हुआ अदरक
  • एक कप पानी

कैसे सेवन करें?

  • एक पैन में कद्दूकस किए हुए अदरक को पानी में उबालें।
  • फिर पांच से दस मिनट बाद इस पानी को छान लें।
  • इसके बाद पानी को ठंडा कर तुरंत पी लें।

कितनी बार पिएं?

आप इसे रोज़ एक या दो बार पी सकते हैं। अगर, आपको अदरक ऐसे पीना पसंद नहीं, तो आप इसे अपनी पसंदीदा सब्ज़ी में दाल सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है?

जब आप हर रोज़ अदरक का सेवन करेंगे तो इससे आपका ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहेगा। अदरक की यह प्राकृतिक एंटीडाइबेटिक प्रकृति मधुमेह वाले लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है।

10) करी पत्ता-

सामग्री

  • 8-10 करी पत्ता

कैसे खाएं?

आप चाहे तो हर रोज़ करी पत्ता को धोकर खाएं या फिर भोजन बनाते समय उसमें थोड़े करी पत्ता का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कब खाएं?

आप हर रोज़ अपने खाने में इसे शामिल कर सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है?

करी पत्ते के सेवन से आपके शरीर में इंसुलिन की प्रक्रिया नियंत्रित रहती है और ब्लड ग्लूकोज़ लेवल भी कम होता है। इसके साथ ही करी पत्ता वजन कम करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी आपकी मदद करता है। साथ ही, डायबिटीज़ की रोकथाम करता है।

11) कलौंजी तेल-

सामग्री

  • 5 एमएल कलौंजी तेल
  • एक कप काली चाय (black tea)

बनाने की विधि

  • एक कप ब्लैक टी में 2.5 एमएल कलौंजी तेल मिलाएं।
  • इस मिश्रण को रोज़ पिएं।

कब करें सेवन?

आप रोज़ एक या दो बार (सुबह और रात में ) इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है?

कलौंजी या कलौंजी का तेल डायबिटीज़ को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। यह न सिर्फ़ डायबिटीज़ के लिए एक अच्छा घरेलु उपचार माना जाता है, बल्कि यह ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी नियंत्रित करता है।

12) दलिया-

आप हर रोज़ एक कटोरा दलिया अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। आप चाहें तो रोज़ दिन में दो बार भी इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे फायदेमंद है?

दलिया में प्रचुर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है। यह ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को नियंत्रित करता है और कोलेस्ट्रॉल को कम कर मधुमेह का उपचार करता है। इसके अलावा दलिया खाने से टाइप-2 मधुमेह के मरीज़ों के ग्लूकोज़ पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। दलिया में मौजूद बीटा-ग्लुकोन (Beta-glucans) ना सिर्फ ब्लड ग्लूकोज़ को कम करते हैं, बल्कि दिल की बीमारी से भी बचाते हैं । हालांकि, यह ज़रूरी नहीं कि सभी प्रकार का दलिया अच्छा हो, फ्लेवर्ड या तुरंत बनने वाले दलिया से दूर रहें, क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा होती है।

मधुमेह में क्या खाना चाहिए -

शुगर के रोगियों को अपने खानपान पर पूरा ध्यान रखना होता है क्योंकि ऐसे रोगियों को अधिक खाना भी नुकसान पहुंचाता है और कम खाना भी। मधुमेह रोगी तीन मुख्य आहारों के अलावा दो बार स्नैक्स भी लें। ऐसे रोगियों को प्रोटीन और कार्बोहाइडे्रट के सही मेल पर ध्यान रखना चाहिए। नाश्ते में ऐसे रोगी दूध वाला दलिया या अंडा ब्रेड ले सकते हैं। दोपहर के खाने के साथ सब्जी, दाल और दो चपाती ले सकते हैं। इसी प्रकार रात के खाने में भी लें। इस प्रकार की डाइट से शुगर का स्तर ठीक रहता है। कार्बोहाइडे्रट शरीर में जल्दी शुगर के रूप में बदल जाता है और प्रोटीन शुगर को धीरे धीरे रिलीज करता है। इससे पेट भरा भरा रहता है और बार बार खाने की इच्छा भी नहीं होती। अधिक तला भोजन नुकसान पहुंचाता है। क्या खाएं:- द्व दिन में जो भी खाएं, थोड़ा थोड़ा कर कई बार खाएं। फल और सब्जियों में 'चेरी, स्ट्राबेरी, सेब, संतरा, अनार, जामुन, पपीता, मौसमी और करेला, घीया, तोरी, सीताफल, खीरा, टमाटर आदि नियमित लें। - डायबिटीज के रोगियों को ला ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजों का सेवन करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में धीरे-धीरे ग्लूकोज में परिवर्तित होती हैं।

इनमें सोया, मूंग दाल, काले चने, राजमां, ब्राउन राइस, अंडे का सफेद हिस्सा, हरी सब्जियां आती हैं। - खाना ऐसा खाएं जिनमें रेशे की मात्रा अधिक हो यानी कि 2० प्रतिशत रेशा हो। स्प्राउट्स का सेवन नियमित करें इनमें एंटी आक्सीडेंट्स काफी होते हैं। चोकरयुक्त आटे की रोटी, दलिया, ओट्स ब्रॉन, राजमा, लोबिया आदि लें।

-वैसे तो डायबिटीज रोगियों के लिए जूस उतना लाभप्रद नहीं है। अगर जूस पीना भी हो तो करेला, खीरा, टमाटर, आंवला और एलोवेरा का जूस ले सकते हैं।

मधुमेह में क्या नहीं खाना चाहिए-

मक्खन, पनीर, मीट, चीज का सेवन कम से कम कर दें। - सफेद चावल का सेवन न करें।

अगर कभी सफेद चावल खाने भी पड़ें तो उबाल कर न खाएं क्योंकि सारे विटामिंस और मिनरल्स अतिरिक्त पानी में निकल जाएंगे। - चीनी, शक्कर, गुड़, शहद गन्ना, चाकलेट, पेस्ट्री, केक, कुल्फी, आइसक्रीम का सेवन न करें। - पैक्ड जूस बिलकुल न लें, न ही सॉफ्ट डिं्रक्स आदि लें क्योंकि इनमें चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है। - हार्ड ड्रिंक्स का सेवन भी न करें।

कभी पीनी भी पड़े तो खाली पेट इसका सेवन न करें क्योंकि शराब से शुगर लेवल एकदम गिर जाता है। अधिक शराब पीने वालों का शुगर लेवल कंट्रोल करना मुश्किल होता है। - मैदा, मक्के का आटा न खाएं क्योंकि यह हाई ग्लाइसिमिक इंडेक्स के अंतर्गत आते हैं और इसके अलावा बहुत फाइन भी होते हैं। - पूरी, परांठे, पकौड़े भी न खाएं क्योंकि ये वजन भी बढ़ाते हैं और कोलेस्ट्राल भी।

- फलों में आम, केला, चीकू, अनन्नास, अंगूर, शरीफा न खाएं क्योंकि इनमें भी शुगर की मात्रा अधिक होती है। - मैदे की ब्रेड, नूडल्स, पिज़ा, बिस्कुट, सूजी, सफेद चावल का सेवन भी न करें। इससे शुगर लेवल बढ़ जाता है। - डाइट के साथ हल्का व्यायाम व लंबी सैर अवश्य करें।

मधुमेह से बचाव-

वज़न को नियंत्रण में रखें – हमेशा अपने वज़न का ध्यान रखें। मोटापा अपने साथ कई बीमारियों को लेकर आता है और डायबिटीज़ भी उन्हीं में से एक है। अगर आपका वज़न ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा हुआ या कम है, तो उस पर तुरंत ध्यान दें और वक़्त रहते इसे नियंत्रित करें।

तनाव से दूर रहें – मधुमेह होने के पीछे तनाव भी ज़िम्मेदार होता है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि अपने मन को शांत रखें और उसके लिए आप योगासन व ध्यान यानी मेडिटेशन का सहारा लें।

नींद पूरी करें – पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेने से या नींद पूरी नहीं होने से भी कई बीमारियां होती हैं। डायबिटीज़ भी उन्हीं में से एक है। इसलिए समय पर सोएं और समय पर उठें।

धूम्रपान से दूर रहें – धूम्रपान से न सिर्फ लंग्स पर असर होता है, बल्कि अगर कोई मधुमेह रोगी धूम्रपान करता है, तो उसे ह्रदय संबंधी रोग होने का ख़तरा बढ़ जाता है।

व्यायाम करें – शारीरिक क्रिया स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर कोई शारीरिक श्रम नहीं होगा, तो वज़न बढ़ने का ख़तरा बढ़ जाता है और फ़िर मधुमेह हो सकता है। इसलिए, जितना हो सके व्यायाम करें। अगर व्यायाम करने का मन न भी करें तो सुबह-शाम टहलने जरूर जाएं, योगासन करें या सीढ़ियां चढ़ें।

मधुमेह पर सख्त शासन करें-

दवाओं के बिना आहार पर सख्त शासन रखना और भी ज़रूरी हो जाता है|”

शुगर का घरेलू इलाज करने का एक और तरीका है अपने आहार पर निगरानी रखना| डॉक्टर ने राजीव को समझाया की इससे ग्लूकोज़ लेवल पर नियंत्रण में रहता है|

अपने dietician से बात करें और उचित आहार चार्ट बनवाएं|

शुगर का लेवल नियंत्रण में रखने के लिए यह आहार कम खाएं –

Processed या packaged खाने की चीज़ें जैसे चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, आदि
सॉफ्ट ड्रिंक्स
कोरमा या ग्रेवी वाला माँसाहारी खाना
स्टार्च-युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मैदे की ब्रेड, पास्ता, चावल, और सूजी या मैदे से बनी हुई चीज़ें
इनके बदले में आटा, जई, जुआर या बाजरे से बने आहार खाएं, जिनसे आपका ग्लूकोज़ नियंत्रण में रहेगा और शरीर को फाइबर मिलेगा|

हल्का-फुल्का खाने के लिए कटे हुए फल, छाछ, स्प्राउट (sprouts) या उबले हुए अंडे का सेवन करें| शुगर को नियंत्रण में रखने के लिए दिन में खाना कम अंतराल में खाएं|

ज़्यादा तेल में तलें आहार या जंक-फ़ूड के बदले भुने हुए खाने को खाएं|

राजीव को अपने जाँच के बाद पता चला शुगर का घरेलू इलाज अनुशासन के साथ ही मुमकिन है| दिए गए जानकारी से संतुष्ट, राजीव ने जीवन-शैली में बदलाव लाने का निर्णय लिया|

मधुमेह के लिए डाइट चार्ट-

सुबह 5 बजे : आधा चम्मच मैथी दाना पाउडर व पानी।

सुबह 7 बजे : 1 कप बिना शक्कर की चाय व 1-2 कम शक्कर वाला बिस्कुट (Biscuits Or Cookies)

सुबह 08:30 बजे नाश्ता : 1 प्लेट उपमा या दलिया व आधी कटोरी अंकुरित अनाज, 100 ml मलाई रहित बिना शक्कर का दूध।

सुबह 10:30 बजे : 1 छोटा छिलके सहित फल केवल 50 ग्राम का या 1 कप पतली छाछ या नींबू पानी।

दोपहर 12:30 बजे भोजन : 2 मिश्रित आटे की सादी रोटी, 1 कटोरी पसिया निकला चावला (चावल उबलने के बाद बचा हुआ पानी ) व 1 कटोरी सादी दाल, 1 कटोरी मलाई रहित दही, आधा कप हरी पत्तेदार सब्जी, सलाद 1 प्लेट।

शाम 4 बजे : 1 कप बिना शक्कर की चाय तथा 1-2 टोस्ट (गेंहू के ब्रेड )।

शाम 6 बजे : 1 कप सूप ।

रात का भोजन 8:30 बजे : दोपहर के समान ही लें |

रात को सोते समय 10:40 बजे : 1 कप बिना शक्कर का मलाई रहित दूध।

अपनी कैलोरीज का निर्धारण डाइटीशियन से बनवाकर उसके अनुसार चलें तो अवश्य ही लाभ होगा व डायबिटीज डाइट चार्ट में खाने के विकल्प भी ज्यादा मिल सकते हैं, जिससे आपका भोजन ज्यादा वैरायटी वाला हो जाता है व बोरियत नहीं होती।

अगर आपको डायबिटिक डाइट में शामिल खानपान की चीजो की बेसिक जानकारी है तो इस डाइट चार्ट में दिनों के अनुसार आसानी से नयी सब्जी या फल बदल सकते है | आप चाहे तो इस पोस्ट डायबिटीज में क्या खाए और क्या नहीं को पढकर अपनी पसंद की फल या सब्जी बदल सकते है |


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रंग अंधापन या रंग दृष्टि समस्या क्या है-  कलर ब्लाइंडनेस एक आनुवांशिक स्थिति है, जो इस बात में अंतर के कारण होती है कि आंख के रेटिना में पाए जाने वाले एक या अधिक प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएं कुछ रंगों के प्रति प्रतिक्रिया करती हैं।  ये कोशिकाएं, जिन्हें शंकु कहा जाता है, प्रकाश की तरंग दैर्ध्य, और रेटिना को रंगों के बीच अंतर करने में सक्षम बनाती हैं।  एक या अधिक शंकु में संवेदनशीलता में यह अंतर किसी व्यक्ति को अंधा बना सकता है।  कलर ब्लाइंडनेस को कलर विजन प्रॉब्लम भी कहा जाता है।  रंग दृष्टि समस्या आपके जीवन को बदल सकती है।  यह सीखना और पढ़ना कठिन बना सकता है, और आप कुछ करियर बनाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।  लेकिन रंग दृष्टि समस्याओं वाले बच्चे और वयस्क अपनी समस्याओं को रंग देखकर सीख सकते हैं।  विभिन्न प्रकार के रंग अंधापन क्या हैं?  रंग अंधापन के सबसे आम प्रकार विरासत में मिले हैं।  वे जीन में दोषों का परिणाम होते हैं जिनमें शंकु में पाए जाने वाले फोटो वर्णक बनाने के निर्देश होते हैं।  दोष के प्रकार और प्रभावित होने वाली शंकु के आधा...

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 दोस्तों अगर आपने (10+2) बायोलॉजी से किया है और आप मेडिकल लाइन में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं तो बी फार्मा(बैचलर ऑफ फार्मेसी)आपके लिए अच्छा विकल्प है आइए जानते हैं बी फार्मा (बैचलर ऑफ फार्मेसी) क्या है- बी फार्मा 12th किया जाने वाला 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स है बी फार्मा का सीधा संबंध दवाई,औषधि,मेडिसिन,ड्रग आदि से है इसके अंतर्गत आपको दवाई बनाने की विधि,किस रोग के लिए कौन सी दवाई हैं दवाई की मात्रा, दवाई के प्रभाव,दुष्प्रभाव और दवाई को स्टोर करना सिखाया जाता है! बी फार्मा कितने ईयर (साल) का होता है- बी फार्मा 4 साल का होता है और इसमें 8 सेमेस्टर होते हैं अगर आपने डी फार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी)किया है तो आपको 2nd ईयर मे एडमिशन मिलता है और यह आपके लिए 3 साल का रहता है और अगर आपने बीएससी (बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस)किया हुआ है तो भी आपको 2nd ईयर में एडमिशन मिलता है और यह आपके लिए 3 साल का रह जाता है! बी फार्मा करने के लिए शैक्षणिक योग्यता- बी फार्मा करने के लिए आपको 12th बायोलॉजी या मैथ 50%अंको से पास होना अनिवार्य है इसके बाद आप बी फार्मा के लिए आवेदन कर सकते हैं! बी फार्मा में दाखिला...